केरला में हाथी के साथ हुए हादसे का जिम्मेदार कौन था|

3 मई 2020 इस दिन को कोई भी नहीं भुला पाएगा क्योंकि केरला में हाथी के साथ जो हुआ वह इंसानियत से भरोसा उठा देता है आज हम जानेंगे आखिर यह पूरा दर्दनाक घटना के पीछे कौन था

केरला में हाथी के साथ हुए हादसे से लोगों को इंसानियत पर भरोसा उठने पर मजबूर कर देती है इस घटना में एक हाथी ऐसे फल को खाता है जिसके अंदर रखा हुआ होता है और जैसे ही वह आती अपने मुंह से उस फल को दबाती है वैसे वह बम फट जाता है और धमाका हो जाता है जस्सी कुछ टाइम बाद उस हाथी की मौत भी हो जाती है|

इस घटना में सबसे ज्यादा बुरी बात यह थी कि वह हथिनी प्रेग्नेंट थी अब उस हाथी के साथ-साथ उस बच्चे की भी मौत हो गई जिसने अभी तक दुनिया में कदम भी नहीं रखा था|

इस घटना का पूरा सच

अगर हम वहां के रिपोर्टर की बात माने तो यह घटना किसानों की वजह से हुई थी दरअसल किसानों ने सुअर को मारने के लिए वह फल के अंदर बम रखा था| किसानों का कहना था कि वह मेहनत करके अपनी फसल उगाते थे और सूअर आकर उनकी सारी मेहनत और फसल को खराब कर देता था जिसकी वजह से उन्होंने वहां के नेता से भी बात की और बहुत से लोगों से इस समस्या को बताने की कोशिश करी लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया और नेताजी ने बोला कि तुम सूअर को हटाने के लिए यहां से भगाने के लिए कोई भी तरकीब इस्तेमाल करो चाहे तो वहां फल में बम रख दो|

नेता ने अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट कर किसानों को एक ऐसा उपाय बताएं जिससे 3 मई 2020 को कोई नहीं भुला सकता अगर हम बात करें इसमें गलती किसकी और किसको सजा दे तो यह सीधे-सीधे नेता के ऊपर और वहां के अन्य कार्यकर्ता उपस्थित है जिन्होंने अपनी जिम्मेदारी ना निभा कर किसानों के ऊपर यह बोझ डाल दिया जिससे किसानों को यह कदम उठाना पड़ा और इसके चलते किसी और की दर्दनाक मौत हो गई|

लोगों ने क्या कहा इसके बारे में|

2020 हमारे यह वैसे ही बहुत बुरा जा रहा है और ऐसे हादसे इंसान को और भी हिला देते हैं और पूछने पर मजबूर कर देते हैं कि इस दुनिया में इंसान सबसे ज्यादा खतरनाक है या कोविड-19 वायरस खतरनाक है|

सोशल मीडिया पर लोग तो यह भी कह रहे हैं कि हम इंसानों को यह वायरस डिस्टर्ब करता है और इसी के लायक है क्योंकि हम इंसानों ने प्रकृति के साथ बहुत ही ज्यादा खिलवाड़ किया है|

हमने पॉल्यूशन लेवल इतना बढ़ा दिया था जिससे बड़े-बड़े जंगलों में ज्यादा तेजी से आग लग रही थी और कह रही थी और हमने बहुत से जंगल खत्म कर दिए थे जिससे जानवरों की रहने की जगह भी कम होने लगी थी और हम इंसान अपने आप को इतना अहमियत देने लगे थे कि बाकी सारी चीजों को हमने एक खिलौना ही समझ लिया था|

इसमें पूरे भारत में रोना वायरस की मरीज 200000 से भी ऊपर पहुंच चुके हैं और पूरे दुनिया भर में लगभग 400000 लोगों की मौत भी हो चुकी और हम भारत की बात करें तो भारत में 6000 लोगों की बहुत ही है कभी भी पूरा देश को रोना से लड़ रहा है तो हम आशा करते हैं आप अगर किसी बाहर निकलते होंगे तो पूरी सावधानी के साथ निकल जाएगा और ज्यादातर करके आप अपने घर ही में रही है जिससे यह बीमारी औरत ना पहले|

 

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